योगी का दलितों के घर खाना भाजपा का दिखावा : मायावती

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भाजपा नेताओ द्वारा दलितों के घर जा कर खाना खाने को बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक दिखावा बताया है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता अनुसूचितों के घर अपना भोजन और बर्तन लेकर खाना खाने जाते हैं, भाजपा का अनुसूचित प्रेम दिखावा है। सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रतापगढ़ में रात्रि प्रवास के दौरान दलित के घर भोजन करने पर मंगलवार को बसपा प्रमुख ने प्रेस को जारी बयान में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा।

मायावती का कहना है कि वास्तविकता में सिर्फ नाम के लिए घर केवल दलितों का होता है परंतु भोजन व बर्तन आदि गैर दलित वर्ग अथवा किसी उच्च वर्ग के घर से तैयार होकर आता है। इसे सत्ताधारी दल की नाटकबाजी नहीं तो क्या कहा जाएं?

गौरमतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ में दयाराम सरोज नाम के दलित के घर खाना खाया है। पर दिलचस्प बात यह है कि योगी आदितयनाथ के आने से पहले दयाराम सरोज के घर कालीन लगाया गया ताकि मुख्यमंत्री योगी वंहा बैठ कर खाना खा सके। योगी के दलित प्रेम का अंदाजा इसी बात से लगा सकते है कि राज्य मंत्री स्वाति सिंह ने अपने हाथो से मुख्यमंत्री के लिए रोटियां बनाई।

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मायावती ने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस के लोग अनुसूचित जातियों  के वोट के चक्कर में मुफ्त की रोटी तोड़ा करते थे और अब भाजपा नेताओं ने भी उनके पदचिह्नों पर चलना शुरू कर दिया है। इस नाटकबाजी से गरीब दलित का ही आटा गीला करने का काम किया जा रहा है। इससे दलितों की जिंदगी पर कोई असर नही पड़ रहा है।

मायावती का ये भी कहा है कि चुनाव नजदीक आने पर ये पार्टियां कई प्रकार की नाटकबाजी करती रहती हैं। इस मामले में भाजपा और कांग्रेस एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। भारत बंद की सफलता के बाद भाजपा सरकारों द्वारा कराई जा रही पुलिसिया कार्रवाई मुंह में राम, बगल में छुरी जैसा विश्वासघाती है।

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अपने से किसी गरीब और कमजोर के घर खाना खाकर मीडिया के लोगो को बुलाकर फोटो खिंचवाना उस व्यक्ति का बहुत बड़ा अपमान है। यह योगी आदित्यनाथ का दलित प्रेम नहीं बल्कि दलितों को प्रति झूठा प्रेम दिखा कर उनका वोट बटोरने का प्रयास मात्र है। 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पता है की उत्तरप्रदेश में पिछले कुछ समय से भाजपा की दलित विरोधी नीतियों निरंतर बढ़ रही है और दलितों का उत्पीडन चरण पर है।

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