महिला पर हुआ 3 महीनों में दूसरा एसिड हमला, अपराधी घूम रहे है बेखौफ

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उत्तर प्रदेश में एसिड अटैक से पीड़ित बिमला पर अपराधियों ने चौथा अटैक किया है. पिछले 90 दिनों में दूसरा हमला है हमारे प्रशासन के लिए शर्म कि बात है की इस महिला की सुरक्षा के लिए एक जवान दिया गया इसके बावजूद महिला पर हमला हो जाता है। यह सब उत्तर प्रदेश के लाचार कानून व्यवस्था के कारण ही ऐसा दर्दनाक घटना घट रहा है।

रायबरेली के ऊंचाहार निवासी बिमला पर शनिवार (1 जुलाई ) की रात एसिड अटैक हुआ। बिमला के साथ कुछ महीने पहले 23 मार्च को एसिड अटैक हुआ था। जिसमे बिमला ने यह बयांन दिया था की उसे जबरदस्ती ट्रैन में तेज़ाब पिलाने की कोशिश की गयी है। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री स्वयं बिमला से मिलने मेडीकल कॉलेज गए थे।

एसिड अटैक पीड़िता अलीगंज में हॉस्टल एकल श्रमजीवी आवास में रहती थी पीड़िता करीब रात आठ बजे पानी भरने आंगन में गई इसी दौरान किसी ने उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया। बताया जा रहा है कि श्रमजीवी आवास की दीवार फांदकर आए एक युवक ने महिला पर एसिड फेंका और दीवार फांदकर ही युवक फरार हो गया। बिमला किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी आईसीयू में एडमिट हैं।

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जानकारी के लिए बता दें कि 2008 में बिमला के साथ उसके गांव में रहने वाले ठाकुर समुदाय के कुछ लोगो ने गैंग रेप किया था जिसका केस अभी तक चल रहा है। उसके बाद 2011 में बिमला पर पहला एसिड अटैक हुआ।

लक्ष्मी शाह कहती है जब बिमला पर पहली बार एसिड अटैक हुआ उसके बाद जब बिमला शेरोएस हैंगऑउट में काम करने लगी इस बीच बिमला को कई बार जान से मारने की धमकी मिल रही थी साथ ही हमे भी बार बार बोला जा रहा था कि बिमला को आप लोग निकाल दो नहीं तो बिमला के शरीर में खून नहीं तेज़ाब दौड़ेगा। 23 मार्च 2017 को जब बिमला अपने गांव से वापस शेरोएस हैंगऑउट आ रही थी तब ट्रैन में बिमला पर एक बार फिर हमला किया गया और इस बार बिमला को जबरदस्ती तेज़ाब पिलाया गया इसके बाद उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री खुद बिमला से मिलने आए तब हमे लगा की अब बिमला को इन्साफ मिल जाएगा पुलिस ने 2 लोगो को गिरफ्तार भी किया पर बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

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जानकारी के लिए बता दें कि लखनऊ पुलिस ने पीड़ित महिला को सुरक्षा दी हुई थी लेकिन जब ये हमला हुआ उस वक्त सुरक्षा में तैनात सिपाही हास्टल के अंदर था. बिमला दो बच्चों की मां है। बिमला एक कैफे में काम करती है जो एसिड अटैक से पीड़ित चलाते हैं। इस हॉस्टल में सभी एसिड अटैक पीड़ित महिलाए रहती है। यह हॉस्टल सरकार की तरफ से दिया गया है इन लोगो को रहने के लिए। इस घटना के बाद से उस हॉस्टल में रहने वाली सभी महिलाए डर में है उन्हें ऐसा लग रहा है की  हॉस्टल के अंदर भी हम सुरक्षित नहीं है।

इस घटना के बाद ऐसा ही लगता है की राज्य में महिलाएं बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है। उत्तर प्रदेश के एक महीने के अंदर यह तीसरा एसिड अटैक हुआ है। उत्तरप्रदेश में खुले आम एसिड बिक रहे है। जबकि 2013 में सुप्रीमकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि बिना पहचान पत्र के देश में किसी को भी तेजाब नहीं दिया जाएगा। खुलेआम बिक रहे एसिड के खिलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं सरकार का यह रवैया निराशाजनक है , एसिड ब्रिकी पर कोई लगाम नही है लगातार प्रदेश में महिला अपराध में बढ़ोत्तरी हो रही है ,अपराधी बेख़ौफ़ हैं।

यह रिपोर्ट लिखे जाने तक बिमला को होश नहीं आया है।

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