ये साफ़ साफ़ अघोषित आपातकाल है – एस आर दारापुरी

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उत्तर प्रदेश प्रशासन हर तरीके से दलितों की आवाज़ को दबाना चाहता है और इसके लिए सरकार किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। इसका जीता जागता सबूत आज सामने आया जब पुलिस ने दलितों और शोषित वर्ग के लिए लड़ने वाले 8 सामाजिक कार्यकर्ताओ को लखनऊ प्रेस क्लब से हिरासत में ले लिया। ये सभी लोग “सहारनपुर/कुशीनगर हो या ऊना जातिवाद से नहीं समझौता” विषय पर विचार गोष्ठी में भाग लेने के लिए लखनऊ प्रेस क्लब में इकठा हुए थे।
इनके अलावा बुंदेलखंड से आये 23 कार्यकर्ता जो नेहरू युवा केन्द्र में ठहरे हुए थे पर रात से ही पुलिस ने नेहरू युवा केन्द्र को घेर लिया था और दलित संगठनों के कार्यकर्तायों के बाहर निकलने पर रोक लगा दी थी। रिटायर्ड आईपीएस अफसर और सामाजिक कार्यकर्ता एस आर दारापुरी के अलावा रमेश दीक्षित, राम कुमार, आशिष अवस्थी को लगभग दोपहर डेढ़ भेज हिरासत में लिया गया था और लगभग साढ़े पांच बजे प्रति व्यक्ति बीस हज़ार के निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।

इसी सिलसिले में जनसंघर्ष की टीम ने सामाजिक कार्यकर्ता एस आर दारापुरी से फ़ोन पर बात की जिसमे उन्होंने आज की घटना को अघोषित आपातकाल बताया। उनसे बातचीत के कुछ अंश।

जनसंघर्ष –  घटना की शुरूवात कैसे हुई ?

एस आर दारापुरी – जब हम लोग सुबह 11:30 बजे प्रेस क्लब पहुंचे तो प्रेस क्लब प्रशासन ने हमको बताया कि हमारी बुकिंग रद्द कर दी गयी है। उस समय हम वहां 9 लोग मौजूद थे और आपस में ये बात कर रहे थे कि यहाँ तो प्रोग्राम कैंसिल हो गया है अब आगे कैसे कुछ किया जाये। तभी प्रशासन के लोग वहां आ जाते है और कहते है कि आप लोगो ने धारा 144 का उलंघन किया है और आप सभी को गिरफ्तार किया जाता है। काफी हैरानी की बात थी कि पुलिस प्रेस क्लब के अंदर धारा 144 के उलंघन का मुकदमा बना रही थी। करीब 1.30 बजे पुलिस हमे ले कर पुलिस लाइन्स थाना आ जाती है और 4 घंटे बाद 20,000 के पर्सनल बांड पर छोड़ देती है।

जनसंघर्ष – पुलिस ने आप लोगो पर कौन कौन सी धाराएं लगाई ?

एस आर दारापुरी – पुलिस ने हम लोगो पर दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 151, 107 और 116 लगाई। ऐसे मामलो में आम तौर पर दबाव ऊपर से ही आता है जब वो हमें गिरफ्तार कर रहे थे तब भी लगातार फ़ोन पर अपने ऊपरी अधिकारियो के दिशा निर्देश ले रहे थे। उनका कहना है कि हम लोग जुलूस निकालने वाले थे जबकि ऐसा नहीं था हम लोग जुलुस नहीं निकालने वाले थे। हमारे कार्यक्रम में काफी दलितों के हको के लिए लड़ने वाले संगठन आने वाले थे जिनको पुलिस ने रोक दिया। उन संगठनो के साथ मिल कर हम सब विचार गोष्ठी करने वाले थे।

जनसंघर्ष – आप आज की घटना को कैसे देखते है ?

एस आर दारापुरीहमने किसी भी कानून का उलंघन नहीं किया था। असल में सरकार ने हमको इसलिए गिरफ्तार किया क्योंकि हमने आपने कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ को 125 किलो की साबुन देने के लिए गुजरात से आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओ को शामिल किया था क्योंकि हम उनके साथ एकता और प्रतिबद्धता दिखाना चाहते थे पर उनको तो सरकार ने झाँसी में ही रोक दिया था और जबरदस्ती उनको वापिस भेज दिया।

आज जो हुआ वो साफ़ साफ़ अघोषित आपातकाल है। सरकार का इरादा है कि किसी भी विरोध की आवाज़ को न उठने दिया जाये और अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचला जाये है। जब आप एक प्रेस क्लब के अंदर ही कोई विचार विमर्श नहीं कर सकते तो अभिव्यक्ति की आज़ादी तो बिलकुल ही खत्म हो गयी।

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