ट्रिपल तलाक और हलाला के नाम पर औरतो का शोषण

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पिछले कुछ दिनों से तीन तलाक का मुद्द्दा काफी जोड़ पकड़ा हुआ है जहा कुछ लोग तीन तलाक को सही ठहरा रहे है तो वही दूसरी तरफ कुछ लोग इसके विरोध में खड़े है। तीन तलाक पर बहस छिड़ने के साथ ही मुस्लिम महिलाएं यह भी कह रही हैं कि हलाला जैसी रस्म के पीछे महिलाओं का शारीरिक शोषण किया जाता है। धर्म के कुछ ठेकेदार मजहब के नाम पर गलत करते हैं।

उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा कि कुरान में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ तीन बार ‘तलाक, तलाक, तलाक’ कहने से तलाक नहीं हो जाता। सलमा अंसारी ने मुस्लिम महिलाओं से कुरान को पढ़ने और समझने को कहा और साथ ही यह भी कहा की तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं को मौलाना गुमराह कर रहे है।

साथ ही तीन तलाक पर सलमा अंसारी ने मुस्लिम औरतो को कहा की अगर हम औरतो ने ‘कुरान पढ़ा है तो खुद ही उसका हल मिल जाएगा। कुरान में तो ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है। तीन तलाक को लोगो ने बेकार का मुद्दा बना रखा है । जिन्होंने कुरान नहीं पढ़ा उनको मालूम ही नहीं है। और बात यह भी है की हम जो कुरान पढ़ते है वो अरबी में होता है और ट्रांसलेशन तो हम पढ़ते नहीं और जो मुल्ला, मौलाना ने कहा मान लिया।

अंसारी ने कहा कि सबसे बड़ा रास्ता दिखाने वाला कुरान है और अगर आप कुरान नहीं पढ़ेंगे तो कोई भी आपको गुमराह कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘कुरान पढ़के देखिए, हदीस पढ़कर देखिए कि रसूल ने क्या कहा गया है । मैं तो यह कहती हूं कि औरतों में इतनी हिम्मत होनी चाहिए कि वे खुद कुरान पढ़ें, उसके बारे में सोचें, उसके बारे में ज्ञान हासिल करें कि रसूल ने क्या कहा, शरीयत क्या कहता है।

“सहारनपुर जिले में महिलाओं का हलाला करवाने के लिए मदरसों में लड़कों को रखा जाता है। यही नहीं, उम्र और सुन्दरता के अनुसार वो महिलाओं के हलाला का पैसा लेते हैं।”
ऑल इंण्डिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर कहती हैं, “हलाला जैसी कुप्रथाएं इतनी जल्दी खत्म नहीं होंगी, हलाला के नाम पर जाने कितनी महिलाओं की ज़िंदगी बर्बाद हो गई। हलाला कराने में अगर कोई महिला गर्भवती हो गई तो वह किसकी संतान होगी? कौन जिम्मेदार होगा? हलाला करने वाले आदमी ने तलाक नहीं दिया तो क्या करेगी महिलाएं? कुरान में कहा गया है कि हलाला की नीयत से किया गया निकाह हराम है।”

क्या है हलाला

मुस्लिम समुदाय में तलाक देने के बाद फिर से उसी शौहर से निकाह करना चाहती है, तो उसे किसी दूसरे व्यक्ति के साथ निकाह करके शारीरिक संबंध बनाना होगा। उसके बाद वह व्यक्ति तलाक देगा, उसके बाद ही महिला अपने पूर्व शौहर से निकाह कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में भी तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दाखिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ 11 मई को समर वकेशन के दौरान इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इससे पहले 27 मार्च को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि मुस्लिमों में जारी इन प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिकाएं न्यायपालिका के दायरे से बाहर है।

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