बिहार इंटर के छात्रों ने रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर आक्रोश मार्च निकला

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बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने मगलवार(30 मई ) को इंटर का रिजल्ट घोषित किया।  हर साल के मुकाबले में इस साल काफी कम रिजल्ट आया है।  बिहार में इस साल 35 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए है जबकि 65 प्रतिशत छात्रो की संख्या अनुतीर्ण होने वालो में से है।
बुधवार को काफी संख्या में इंटर काउंसिल के कार्यालय के बाहर अनुतीर्ण हुए छात्रों ने धरना -प्रदर्शन कर रहे हैं।छात्रों का आरोप है कि इंटर काउंसिल ने जान-बूझकर उनके रिजल्ट में गड़बड़ी की है। सौ से दो सौ की संख्या में छात्र इंटर के रिजल्ट में हुए गड़बड़ी को लेकर काउंसिल के गेट पर जमा हैं और हंगामा मचा रहे हैं।छात्र शिक्षा मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए दोबारा परीक्षा लेने की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र को रोकने ने लिए छात्रों पर लाठी चार्ज करना पड़ा है। पुलिस छात्रों को खदेड़-खदेड़कर भगा रही थी। इससे कई छात्र घायल हो गए हैं। पुलिस ने छात्रों को बेहरमी से पीटा , पुलिस ने आस-पास की दुकानें में खड़े छात्रों पर भी जमकर लाठियां बरसायी हैं।बताया जा रहा है छात्रों की ओर से पत्थर भी फेंके गये हैं। पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया है।
छात्रों ने रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर आक्रोश मार्च का आयोजन किया है। आज वे करगिल चौक से पटना विवि गेट तक आक्रोश मार्च करेंगे। वहीं दूसरी ओर छात्रों की संख्या और उनके आक्रोश को देखते हुए इंटर काउंसिल कार्यालय के पास काफी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
छात्रों ने गुस्से में तोड़फोड़ मचाया है। उन्होंने आस-पास रखे हुए निगम के डस्टबीन को तोड़ दिया है। छात्रों का कहना है कि सभी विषयों में पास होने के बाद भी फेल बता दिया गया है। छात्रों का आरोप है कि कहीं थ्यूरी में एक नंबर दिया गया है, ऐसा कहीं होता है क्या?
छात्र काफी गुस्से में हैं और सड़क पर पूरी तरह अफरा-तफरी मची हुई है। वही बिहार के अलग अलग जिलों से खबर आ रही है की बिहार इंटर का रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने खुदखुशी कर ली है।  कैमूर में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। बताया जा रहा है कि जिले के रामगढ़ के लबेदहा गांव की घटना है, जहां रिजल्ट निकलने के बाद छात्रा ने खुदकुशी कर ली। जबकि भोजपुर जिले की रहने वाली एक युवती ने इंटर में फेल होने पर ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी है ।वही जहानाबाद के पास मसौढ़ी की रहने वाली पुनिता ने अपने आप को गोली मार ली।  पुनिता को हिंदी में सिर्फ 3 नम्बर मिले थे।
वही बिहार की टॉपर खुशबु भी अपने मार्क्स से खुश नहीं है खुशबु का कहना है कि मैं  भले ही बिहार की टॉपर हूँ पर मेरा दिल्ली में नामांकन इतने नंबर के साथ नही हो सकता है. मैं अपना कॉपी री-चेक करवाउंगी। खुशबु का मानना है कि इतने सारे बच्चे एक साथ कैसे फेल हो सकते है। खुशबु को मैथ में 98, फिजिक्स में 91, और कमेस्ट्री में 91, और इंग्लिश में 73 अंक मिले हैं. जबकि हिंदी में उन्हें सिर्फ 78 मार्क्स मिले हैं।
छात्रों का कहना है की बिहार के ख़राब रिजल्ट के लिए  जहाँ सिस्टम दोषी है वही  माध्यमिक शिक्षक संघ,और वित्त रहित शिक्षक भी कम दोषी नही है  कॉपी जांच के समय इन संघो के शिक्षक कॉपी जांच का बहिष्कार कर रहे थे। और हड़ताल पर चले गए थे जिसके बाद बोर्ड के द्वारा प्राइमरी,मिडिल और प्राइवेट स्कूल के शिक्षको से कॉपी जांच कराई गई। यदि कॉपी जांच का बहिष्कार नही होता तो शायद बिहार इंटर का रिजल्ट ऐसा नहीं आता
 पटना के साथ साथ बिहार के कई जिलों में छात्रों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए सासाराम में भी छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया है। इंटरमीडिएट में फेल छात्रों का कहना है कि रिजल्ट में गड़बड़ी की गई है इसीलिए रिजल्ट इतना खराब रहा है। छात्र पुनर्मूल्यांकन की बात कर रहे हैं।इंटर काउंसिल के पास भारी संख्या में अभिभावक भी पहुंच गये हैं। उनका आरोप है कि छात्रों की कॉपियों की सही तरीके से जांची नहीं गयी हैं।
वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन आईसा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी फेल छात्रों के समर्थन में उतर गये हैं। छात्र संगठनों ने बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर और बिहार सरकार का पुतला फूंका और सरकार विरोधी नारे लगाये। आक्रोशित छात्र सड़क पर हंगामा कर रहे हैं।
सुपौल जिले मे भी इंटर साइंस के खराब नतीजे पर त्रिवेणीगंज में छात्र जमकर हंगामा मचा रहे हैं। काफी संख्या में छात्र सडक पर उतर आए हैं और लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
वही बिहार के  जदयू प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री का यह  कह कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे है कि  कदाचार मुक्त परीक्षा के कारण रिजल्ट खराब हुआ हुआ है

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