जातिवाद का सच – दलितों से चंदा ले लिया पर हवन में एंट्री बैन

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एक तरफ भारत में एक दलित राष्ट्रपति बनने जा रहा है तो वही दूसरी तरफ भाजपा सरकार के राज में दलितों के उत्पीड़न की घटनाऐं लगातार सामने आ रहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाना चाहते है तो वही दूसरी तरफ मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के पैतृक गांव में दलितों के खिलाफ शर्मनाक फरमान सुनाया जा रहा है। जिस पर भारी विवाद हो रहा है. यह घटना हरियाणा के जींद जिले के गांव की है जहां एक मंदिर में शुरू हुए हवन यज्ञ में दलितों को भाग नहीं लेने को कहा गया है। इससे आहत दलित समाज के लोगों ने पुलिस में लिखित शिकायत देकर फरमान सुनाने वाले पर कार्रवाई करने को कहा है।

आपको बता दे कि यह घटना हरियाणा के जींद जिले के गांव डूमरखा खुर्द की है,गांव के एक मंदिर में मंगलवार को एक हवन शुरू किया गया यज्ञ से पहले गांव के लोगों की बैठक हुई, जिसमें एक पंडित ने हवन से दलित समाज को दूर रहने का फरमान जारी कर दिया. यह सुनकर दलित समाज के लोगों ने पंडित के फरमान का विरोध कर दिया. जब उन पर पंडित के आदेश का पालन करने के लिए दबाव डाला गया तो उन्होंने सदर थाने में लिखित शिकायत कर दी। दलित समाज के लोगों ने पुलिस से गुहार लगाई कि जात-पांत का जहर फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

वही दूसरी तरफ गांव के दलित समुदाय के लोगो का कहना है कि उन्होंने ने गांव मंदिर में हवन के लिए चंदा दिया है इसके अलावा दूसरे कार्यो में भी सहयोग दिया है गांव में हवन भाईचारा बनाए रखने और सुख समृद्धि के लिए कराया जा रहा है और ऐसे में दलित समाज को हवन से दूर रखना हमारे अधिकारों का हनन है। प्रसाशन को फरमान सुनाने वाले के ऊपर कार्यवाई करनी होगी।

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यज्ञ से पहले पंडित ने जारी किया शर्मनाक फरमान

यज्ञ से पहले गांव के लोगों की बैठक हुई, जिसमें एक पंडित ने हवन से दलित समाज को दूर रहने का फरमान जारी कर दिया। उसने कहा कि अगर दलितों ने यज्ञ में प्रवेश किया तो विघ्न पड़ जाएगा और गांव में शांति नहीं रहेगी। दलित सिर्फ भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

कार्रवाई न करने पर दलितों की चेतावनी

दलितों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने मामले में कार्रवाई नहीं की तो वह धरना प्रदर्शन करेंगे और प्रशासन के आला अधिकारियों से शिकायत करेंगे। वहीं, सदर थाना पुलिस का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। लेकिन दलित समाज का कहना है कि पुलिस ने दबाव डालकर समझौता कराया है। दलित समाज के लोगों का कहना है कि यदि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन करेंगे और पुलिस के आला अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाएंगे।

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