राजस्थान में जाटो का आरक्षण के लिए आंदोलन, सड़को और रेल मार्गो को बाधित किया

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राजस्थान के भरतपुर में जाट आंदोलन एक बार फिर आरक्षण को लेकर सक्रीय हो गया है। भरतपुर से होकर जाने वाले ट्रेन के साथ ही सड़क मार्ग पर भी कई जगह जाट समाज ने कब्जा कल लिया है। भरतपुर को जोड़ने वाली सड़कों पर जाट आंदोलनकारी नजर आ रहे हैं। सरकारी बसों के साथ ही निजी वाहन तक, सभी पर आंदोलन का असर देखने को मिलने लगा है।जाटों के तेवर देखकर लग रहा है कि इस बार फिर से रेल की पटरियां उखड़ेंगी और आरक्षण की मांग को लेकर हिंसा, आगजनी की वारदातें हो सकती है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि शुक्रवार (आज ) संघर्ष समिति के संरक्षक व कांग्रेस विधायक विश्वेन्द्र सिंह का जन्मदिन है, इसलिए हाइवे पर ही केक काटा जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि सड़क मार्ग से होकर गुजरने वाले लोगों की परेशानी अब और भी बढ़ सकती है। जाटों के आरक्षण आंदोलन की वजह से यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है. रेलवे प्रशासन ने अब तक तीन टेनें रद्द की हैं, जबकि 6 ट्रेनों के रूट बदले हैं.

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. जाटों की मांग है कि आरक्षण पर सरकार लिखकर जवाब दे।

विधायक विश्वेंद्र सिंह ने कहा है कि अगर सरकार आरक्षण पर लिखित में जवाब नहीं देती है, तो किसी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी.
कांग्रेस विधायक ने वसुंधरा राजे सरकार पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि सरकार के मंत्री दो साल से लगातार कोरा आश्वासन दे रहे हैं, मगर अब इसकी भी गुंजाइश ख़त्म हो गई है.

आंदोलन की वजह

राजस्थान में धौलपुर और भरतपुर के जाटों को छोड़कर सभी जिलों के जाटों को आरक्षण मिला हुआ है. इन्हें इस आधार पर नहीं मिला था कि इन जिलों में जाट राजघराना रहा है. धौलपुर के जाट राजघराने की पूर्व महरानी तो खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हैं. मगर धौलपुर में जाटों की संख्या न के बराबर है, इसलिए सारा आंदोलन भरतपुर में हो रहा है. बाद में 2002 में तत्कालीन गहलोत सरकार ने इन जिलों के जाटों को भी राज्य सरकार में आरक्षण दे दिया था, मगर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी।

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