पटना के प्रतिष्ठित जीपीओ के सौ साल

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बिहार में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं जिनमें से एक है बिहार की राजधानी पटना का जीपीओ (जनरल पोस्ट आॅफिस)।पटना का जनरल पोस्ट आॅफिस (जीपीओ) जुलाई 2017 को 100 साल का हो गया है। जुलाई 1917 को ब्रिटिश काल में बने जीपीओ को हैरिटेज बिल्डिंग की सूची में शामिल किया गया है।

इस भवन को बनाने में तब 2 लाख 67 हजार 667 रुपए खर्च हुए थे. पहले इसका नाम बांकीपुर डाकघर था. बांकीपुर पटना का पुराना नाम भी है। सबसे खास बात तो यह है कि दुनिया का पहला प्रीपेड टिकट वर्ष 1773 में राजधानी पटना में शुरू हुआ था. इसे ‘तांबे की टिकट या अजीमाबाद इकन्नी’ या ‘अजीमबाद अटेंनमी’ के रूप में जाना जाता है।

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राज्य में जीपीओ सबसे पहला नाइट पोस्ट ऑफिस बना था जहां सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच काम होता पटना जीपीओ में समय के साथ कई बदलाव किए गए इसके बावजूद यहां की ऐतिहासिक चीजों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया गया। आज भी यहां ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के शासनकाल की पत्र पेटी रखी हुई है।हालांकि यह 1874 से 1911 ई. के बीच चलन में था।

लोहे से बने 4 फीट लंबाई के इस लेटरबॉक्स के सबसे ऊपरी भाग में विक्टोरिया शासन का प्रतीक चिह्न बना हुआ है. उसके नीचे लेटर डालने के लिए जगह बनाई गई है. इसे इतिहास के रूप में रखा गया है। जीपीओ को ब्रिटिश गौथिक शैली में बनाया गया है। उस समय इस तरह की बिहार में तीन इमारतें और बनी थीं, जिनमें पटना म्यूजियम, पटना हाई कोर्ट और पुराना सचिवालय शामिल है। 1915 में बायसराय चार्ल्स हार्डिंग ने इसकी नींव रखी थी। इसके आर्किटेक्ट जोसेफ म्यूनिंग थे।

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