अगला लोकसभा चुनाव पूरी तरह वीवीपैट मशीन से

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सरकार ने ईवीएम मशीन पर सवाल उठाने वाले सभी नेताओं और सभी पार्टियों की बोलती बंद करने वाला एक ठोस कदम उठाया है। वर्ष 2019 में होने वाला देश का अगला लोकसभा चुनाव पूरी तरह वीवीपैट (Voter Vefiable Paper Audit Trail) मशीनों के जरिए ही होगा.।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बुधवार को कैबिनेट की बैठक में बाद मतदाता सत्यापन की पर्ची दिखाने वाली मशीन (VVPAT) के खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी । चुनाव आयोग ने देश के सभी मतदान केंद्रों के लिए 16 लाख से अधिक पेपर ट्रेल मशीनों की खरीद के लिए 3,174 करोड़ रुपये मांगे हैं। कैबिनेट ने नई इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की खरीद के लिए अब तक दो किस्तों में 1,009 करोड़ रुपये और 9,200 करोड़ रुपयों की मंजूरी दे चुकी है।
वीवीपैट(VVPAT) मशीन की खासियत

वीवीपैट (VVPAT) मशीन में वोट डालने के बाद वोटर को एक पर्ची मिलेगी जिसमें उस पार्टी का चिह्न बना होगा जिसे उसने वोट दिया होगा। हालांकि दिखने के बाद यह पर्ची तुरंत एक बॉक्स में गिर जाएगी। मतलब मतदाता इसे अपने साथ नहीं ले जा पाएंगे। सिर्फ सात सेकंड तक ही यह पर्ची दिखेगी। जरूरत होने पर वोट डालते समय निकले वाली पर्ची से दोबारा गिनती करके उसे ईवीएम के नतीजे से मिलाया भी जा सकेगा.।
केंद्र सरकार ने ये फैसला ऐसे समय पर लिया है जब विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बीएसपी, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने ईवीएम मशीन को लेकर सवाल उठाए थे और कहा था कि हो सकता है बीजेपी को जिताने के लिए इन मशीनों में छेड़छाड़ की गई हो. हालांकि सरकार और निवार्चन आयोग दोनों ने ये बार-बार कहा था कि ईवीएम मशीन पूरी तरह से भरोसेमंद हैं और इन से छेड़छाड़ करना नामुमकिन है.
दरअसल प्रयोग के तौर पर वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल 2013 से शुरू हो गया है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसे चुनाव में इस्तेमाल किये जाने के लिए लाखों मशीनों की जरूरत है जिसके लिए निवार्चन आयोग लंबे समय से धन की मांग कर रहा था. 22 मार्च को कानून मंत्रालय को लिखी गयी चिठ्ठी में निवार्चन आयोग ने कहा था मौजूदा माहौल में जिस तरह से ईवीएम मशीनों को लेकर सवाल उठाया जा रहा है उसे देखते हुए वीवीपैट मशीनों को खरीदने में देऱ करना ठीक नहीं होगा। निवार्चन आयोग का कहना था कि अगर 2019 में वीवीपैट मशीनें से चुनाव कराना है तो अभी से मशीनों की खरीद के लिए ऑर्डर देना होगा.

आयोग ने कहा है कि पब्लिक सेक्टर की दो कंपनियां, ECIL और BEL को 16 लाख मशीनें बनाने के लिए तकरीबन 30 महीने का समय चाहिए। 16 राजनीतिक दलों ने हाल ही में चुनाव आयोग के समक्ष अपने ज्ञापन में व्यापक पारदर्शिता के लिए पेपर बैलेट प्रणाली लागू करने को कहा था। बीएसपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने EVM में कथित छेडछाड़ के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा था।

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