योगी ने दलित मित्र अवार्ड का कर्ज चुकाया, लालजी निर्मल को दिया सरकारी पद

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दलित समाज के विरोध के बावजूद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र अवार्ड देने से सुर्खियों में आये अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल को योगी आदित्यनाथ ने रिटर्न गिफ्ट देने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने लालजी निर्मल को उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम में अध्यक्ष पद में न्युक्त किया है इस पद को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है।

14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में अम्बेडकर महासभा द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र अवार्ड से पुस्कृत किया गया था। योगी को अम्बेडकर महासभा द्वारा दलित मित्र अवार्ड दिए जाने का बहुत विरोध हुआ और इसमें काफी विवादित बातें सामने आयी थी। बहुत से बहुजन चिंतकों का मानना है कि योगी सरकार में दलितों का उत्पीड़न हो रहा है और ऐसे माहौल में योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र कैसे कहा जा सकता है। पर चौतरफा विरोध को दरकिनार करते हुए अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष लालजी निर्मल ने योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र अवार्ड से पुस्कृत करने के अपने निर्णय को नहीं बदला।

Notification from Chief Minister Yogi Adityanath’s Office

पूर्व पुलिस महानिरीक्षक तथा अम्बेडकर महासभा के संस्थापक एवं आजीवन सदस्य एस आर दारापुरी ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा है कि योगी सरकार ने लालजी निर्मल को दलित समाज के साथ गद्दारी के लिए ये पद इनाम में दिया है।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एस आर दारापुरी ने जनसंघर्ष से बातचीत में कहा कि योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र अवार्ड अम्बेडकर महासभा ने नहीं बल्कि लालजी निर्मल ने दिया था। अम्बेडकर महासभा की कार्यकारिणी ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ। असलियत ये है कि अम्बेडकर महासभा में दलित मित्र नाम का कोई अवार्ड है ही नहीं।

दारापुरी ने लालजी निर्मल पर राजनैतिक महत्वकांशाओ के चलते ऐसा कदम उठाने का आरोप लगाया है। “डॉ. निर्मल ने धोखे से यह अवार्ड योगी आदित्यनाथ को दिया है, अम्बेडकर महासभा के कार्यकारिणी सदस्यों को इस बात का पता भी नहीं था हमने यह खबर अखबार के जरिए पता चली और तब हम सबने इसका खुल कर विरोध किया था पर उन्होंने अपने निर्णय को नहीं बदला।

दारापुरी ने कहा है कि हमने मांग की है कि अम्बेडकर महासभा की AGM में लालजी को अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने का प्रस्ताव लाएंगे। “उनकी अध्यक्ष पर न्युक्ति ही फ़र्ज़ी है, उन्होंने फ़र्ज़ी हस्ताक्षरों के बल पर अध्यक्षता प्राप्त की थी और इसलिए अब हम लालजी निर्मल पर फ्रॉड का केस दायर करेंगे। ”

गौरमतलब है कि पिछले साल सहारनपुर में हुए दलितों पर हमले में और फिलहाल में हुए एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ बहुजन समाज द्वारा भारत बंद आंदोलन में दलितों को निशाना बनाया जा रहा है। निर्दोष दलित युवाओ को पुलिस घर से उठा रही है, और उनके साथ जेल में टार्चर किया जा रहा है। दलित युवाओ पर फर्जी केस किये जा रहे है और इस डर में काफी जगह युवा गांव छोड़ कर भाग गए है। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेकर आज़ाद रावण पर भी रासुका लगा कर उसे जेल में रखा जा रहा है।

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