फर्जी जाति प्रमाणपत्र से नौकरी पाने वालो को नौकरी का हक़ नहीं – सुप्रीमकोर्ट

खबरे

सरकार नौकरी हर किसी का सपना होता है। हर कोई चाहता है कि उसकी सरकारी नौकरी लग जाए और वे आराम की जिंदगी व्यतित करे। हालांकि, अक्सर कुछ लोग सरकारी नौकरी की चाहत में सरकार द्वारा दी गई रियायतों का गलत फायदा उठाते आ रहे है । अल्पसंख्यक लोगों को ज्यादा से ज्यादा सरकारी नौकरी में मौका मिले, इसके लिए सरकार आरक्षण मुहैया कराती है। जिसका फायदा कभी कभी कुछ गलत लोग भी उठाते है।

इसी को मद्देनज़र रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार(6 जुलाई ) को एक रोजगार संबंधी केस की सुनवाई करते हुए कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो कितने ऊंचे पद पर कार्यरत है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति को नकली जाति (दस्तावेज) के आधार पर 20 साल के लिए नौकरी मिल गई है, तो वह नौकरी खो देगा और उसे दंडित भी किया जाएगा.

 यह भी पढ़े  जातिवाद का सच – दलितों से चंदा ले लिया पर हवन में एंट्री बैन

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चन्द्रचूड़ की पीठ ने इस संदर्भ में बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को सही नहीं ठहराया जिसने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति बहुत लंबे समय से नौकरी कर रहा है और बाद में उसका प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो, उसे सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है।

हालांकि, कई लोग सरकारी नौकरी के लालच में फर्जी जाति प्रमाण पत्र दिखाकर नौकरी हथिया लेते हैं। इन्ही लोगों पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फर्जीवड़े पर सख्त रूख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं कि यदि कोई फर्जी प्रमाण के साथ पकड़ा गया तो उसको नौकरी व डिग्री दोनों से ही छिन ली जाएगी।

आपको बता दें, राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ जितेन्द्र सिंह ने मार्च में ये जानकारी लोकसभा में साझा की थी कि 1832 ऐसे केस हैं, जिसमें लोग नौकरी के लिए फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करते हैं।

Leave a Reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *