क्यों हमारे देश के 71 प्रतिशत बुजुर्ग को काम करना पड़ता है?

खबरे गरीबी ग्रामीण भारत स्वास्थ्य

यूनाइटेड नेशनल पापूलेशन फंड इंडिया के एक सर्वे से यह बात सामने आई है की भारत में 60 से 80 तक की उम्र वाले करीब 71 प्रतिशत बुजुर्ग काम करने के लिए  मजबूर है इस सर्वे को कई सगढ़नो ने अंजाम दिया था इसमें देखा गया की 71 प्रतिशत बुजुर्ग आर्थिक जरूरते पूरी करने के लिए काम करते है न कि अपनी इच्छा से यह भी देखा गया है कि काम में मौजूदा भागीदारी , गरीबी और निक्षरता के बीच करीबी रिश्ता है यह सर्वे केरल तमिलनाडु , महाराष्ट्रा ,ओड़िशा ,पश्चिम  बंगाल ,पंजाब और  हिमाचलप्रदेश ,में किया गया यहाँ पर आबादी का बड़ा हिस्सा बुजुर्ग है यह सर्वे कई बातो को ध्यान में रख कर किया गया है  जैसे की लोगो की सामाजिक – आर्थिक हेसियत ,काम में भागीदारी और फायदों इनकम और मालिकाना सम्पति रहने के इतजाम हेल्थ अवस्था,  हेल्थ सुरक्षा ,और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता है सर्वे से पता चला की बुजुर्ग पुरुषो की काम में भागीदारी 39  प्रतिशत है वही महिलायों की 11  प्रतिशत है इनमे से ज्यादातर की उम्र 60 से 69  प्रतिशत  के बीच में  है वही 80 या इसे अधिक उम्र वाले बुजुर्गो में काम करने की भागीदारी के मामले में पुरुषो का प्रतिशत 13 है जबकि महिलायों का प्रतिशत 3 है हलाकि महिलायों की काम में भागीदारी कम देखी गयी है
अभी तक 84 फीसदी लोगो को  किसी भी सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलता है केरल और हिमाचल प्रदेश में केबल अठारह प्रतिशत लोगो को पेंशन मिलता है, जबकि तमिलनाडु, और  महाराष्ट्र, ओडिशा में  केवल चार प्रतिशत लोगो को मिलता है इससे पता चलता है की 70 प्रतिशत लोगो को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना , (प्ळछव्।च्ै) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (प्ळछॅच्ै) के बारे में जानते है पर केवल  40 प्रतिशत लोग ही अन्नपूर्णा योजना के बारे में जानते है यूएनएफपीए के एक सर्वेक्षण के अनुसार 2050 तक हमारे देश में  बूजुर्गो की संख्या लगभग 315 लाख छूने की उम्मीद है.हालाकि काम की भागीदारी महिलायों के बीच काफी कम देखी गयी है क्योंकि महिलाए घर के काम में अपना योगदान करती है जबकि दूसरी तरफ  पुरुष लोग बाहर का काम  करते है जिनमे से 70 प्रतिशत लोग खुद की जरूरतों को पूरा करने के लिए करते है और नौ प्रतिशत लोग घर के आय को पूरा करने के लिए काम करते है
आज कल ज्यादा  तर बुजुर्गो को काम इसलिए करना पड़ता है क्योंकि आज कल हमारे देश में बुजुर्गो की अहमियत घट गयी है आज की युवा पीढ़ी सिर्फ खुद के बारे में सोचती है उन्हें कोई  फर्क नही पड़ता है की उनके माँ बाप क्या कर रहे है क्या खा रहे है और कैसे रह रहे है इसलिए अधिकतर बुजुर्ग को खुद के खाने और रहने के लिए 60 साल के बाद भी काम करना पड़ता है और दूसरा कारण यह है कि सरकार की पेंशन योजना इतनी अच्छी नही है की लोग सेवानिवृत्ति होने के बाद अपनी जरूरतों को पूरा नही कर सकते है इसलिए सरकार को चाहिए की वो बुजुर्ग के लिए अच्छी योजना निकाले जिससे आने वाले सालो में हमारे बुजुर्ग को अच्छी सुविधा मिल सके और 60 के बाद लोगो को काम न करना पडे
भारत में हर 10 बुजुर्ग जोडे  में से 6 जोड़े  मजबूर है अपने ही घर से बाहर रहने के लिए क्योंकि हमारे बुजुर्ग को वो प्यार नही मिल पा रहा है जो उन्हें अपने बच्चो से मिलना चाहिए उनके पास रहने के लिए घर नही है इसलिए आज कल बुजुर्गो को वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड रहा है और जो लोग वृद्धाश्रम नही जाना चाहते है उन्हें मज़बूरी में काम कर के अपना घर चलाना पड़ रहा है
वही दूसरी तरफ माँ बाप जैसे जैसे बूढ़े होते जाते है वो अपनी सारी जमीन और जायदाद अपने बच्चो के नाम कर देते है जिसके कारण उन्हें अपना सब कुछ खोना पड़ता है . भारत में बुजुर्ग कि  आबादी लगातार बढ़ रही है और साथ में  इन लोगों कि  समस्याओं भी बढ़ रही हैं. वृद्धाश्रम में लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह भी माता पिता के अधिकांश अब अपने बच्चों के साथ रहने के बजाय वृद्धाश्रम में रहने का फैसला कर रहे हैं.
हम हमारे समाज में देख रहे हैं क्या है कि बच्चों को उनके माता – पिता की देखभाल के लिए तैयार नहीं कर रहे हैं, वे उन पर पैसा खर्च नहीं करना चाहते, वे एलियंस के रूप में उनके माता – पिता का इलाज कर रहे हैं, वे एक भावनात्मक बंधन को साझा नहीं करना चाहते माता – पिता के साथ. इन बच्चों को भूल रहे हैं कि उनके जीवन की नींव के माता – पिता के द्वारा बनाया गया है. वे अपने माता – पिता के प्रति अपने नैतिक और नैतिक कर्तव्य को भूल रहे हैं. यह तेजी से जीवन, औद्योगीकरण, पैसा उन्मुख मन, मुद्रास्फीति आदि बच्चे अपने व्यस्त कार्यक्रम की वजह से और इस स्थिति का एक परिणाम के रूप में बड़ों उपेक्षित हो रहे हैं
अगर हमे अपने देश से बुजुर्गो को काम करने से रोकना है तो इसके लिए हमे कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होगे। जिससे हमारे देश के बुजुर्ग सेवानिवृत्ति होने के बाद आराम की जिंदगी जी सके उन्हें अपने बुढ़ापे में किसी की सहारे की जरुरत न पडे बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना, जीवन की सुरक्षा और वृद्ध व्यक्तियों की संपत्ति के लिए एक उपयुक्त तंत्र के संस्थानीकरण और  हर जिले में वृद्धाश्रम की स्थापना

Leave a Reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *