मुरादाबाद के बाद अलीगढ़ के दलितों ने हिन्दू धर्म छोड़ने का फैसला किया

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उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़ण का मामला कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। सहारनपुर के बाद अब अलीगढ़ के के लोधा थाना क्षेत्र में रविवार (21 मई ) को दलितों ने गांव के ही तालाब में देवी देवताओं की मूर्तियों एवं कैलेंडरों को रख कर प्रदर्शन किया। दलितों का कहना था कि उनके साथ इंसाफ नहीं हुआ, तो वे इस्लाम धर्म अपना लेंगे।

दलितों ने बताया कि 16 मई को गांव में ही एक नाली बनाने को लेकर उनका सवर्ण समुदाय के लोगों से विवाद हो गया था। नाली जानबूझ कर उनके घर, मंदिर की ओर निकाली जा रही है, जिसका विरोध करने पर सवर्ण समुदाय के लोगों ने उनके घरों में घुस कर मारपीट की थी। पुलिस ने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए उन पर ही छेड़खानी का आरोप लगाते हुए 354 की धारा के तहत केस दायर कर दिया ।

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क्या था मामला

अलीगढ के केशोपुर जोफरी गांव के लोधा थाना क्षेत्र में 16 मई को नाली निर्माण को लेकर उनका सवर्ण समुदाय के लोगों से विवाद हो गया था। दलितों का कहना है की नाली जानबूझ कर हमारे घर और मंदिर की ओर निकाली जा रही है, जिसका विरोध करने पर सवर्ण समुदाय के लोगों ने हमारे घरों में घुस कर मारपीट की थी।

जातीय संघर्ष के बाद गांव केशोपुर जोफरी के दलित परिवारों ने इस्लाम धर्म अपनाने का ऐलान कर दिया है। दलितों का कहना है कि पुलिस ने उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की है। गांव पहुंचे एसडीएम कोल सहित अन्य अधिकारियों ने दलितों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। गांव में तनाव बरकरार है।

प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर एसडीएम कोल डा. पंकज वर्मा अन्य अधिकारियों के साथ गांव पहुंचे और दलितों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने और अपनी बात पर अडिग रहे।
प्रशासन का कहना है कि नाली खोदने वाले पक्ष ने दलितों की बस्ती की ओर नाली खोद दी, जो उचित नहीं था।

2 thoughts on “मुरादाबाद के बाद अलीगढ़ के दलितों ने हिन्दू धर्म छोड़ने का फैसला किया

  1. दलितों को हिन्दु कब बनाया गया था ? ब्राहमन,क्षेत्रिय,वैश्य और शुद्र में दलित वर्ग नहीं था . क्योंकि दलितों के लिए हिन्दु धर्म में कोई संस्कार बने ही नहीं जिनकी पालना करने पर वह हिन्दु रहेगा.दलित हमेशा स्वतंत्र था .संविधान बनने से पूर्व दलित हिन्दु नहीं था.बाद में शुद्रों में जोड़ा गया है.शुद्र =नाई,खाती,कुम्हार,लुहार,सुनार ,माली ,डाकोत,तारगआदि आदि शुद्र थे.

  2. बहुत सही कर रहे है वे लोग |जीस धर्म मे ईज्जत से जी नही सकते एेसे धर्म मे रहना ही बेकार है| ईन्सान को ईन्सान न समझने वाला धर्म धर्म नही हो सकता|

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