चिदंबरम ने सरकार से पूछा, जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति न करने की वजह धर्म या उत्तराखंड फैसला ?

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केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश के बाद वकील इंदू मल्‍होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्‍त किए जाने को मंजूरी दे दी है। लेकिन सरकार ने जस्‍टिस केएम जोसेफ की पदोन्नति रोकने का फैसला लिया है। जिसके बाद से कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया है

उत्तराखंड के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ का प्रमोशन रोकने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, “मुझे खुशी है कि इंदू मल्‍होत्रा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगी। लेकिन मैं इस बात से निराश हूं कि जस्‍ट‍िस के एम जोसेफ का प्रमोशन रोक दिया गया है। के एम जोसेफ की पदोन्नति आखिर क्‍यों रोकी गई है? क्‍या इसके लिए उनका राज्‍य, उनका धर्म या उत्‍तराखंड केस में लिया गया उनका फैसला जिम्‍मेदार है?”

कांग्रेस नेता पी चिंदबरम ने उत्तराखंड के केस का जिक्र किया जिसमे 21 मार्च, 2016 को चीफ जस्टिस केएम जोसेफ की खंडपीठ ने उत्तराखंड में केंद्र के राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलट दिया था। इस फैसले के बाद हरीश रावत दोबारा उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री बन गए थे। जस्टि‍स जोसेफ और जस्ट‍िस वीके बिष्ट की बेंच ने फैसले में कहा था कि केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड में राष्‍ट्रपति शासन लगाना सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित नियम के खिलाफ है।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, “उत्तराखंड के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ देश के वरिष्ठ जजों में से एक हैं। बावजूद इसके मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी, क्योंकि उन्होंने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला दिया था।”

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