छत्तीसगढ के कलेक्टर अवनीश कुमार की पहल,अपनी बेटी का एडमिशन करवाया सरकारी स्कूल में

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8 अगस्त 2015 को उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने फैसला दिया था कि सरकारी वेतन पाने वालों के बच्चों का सरकारी विद्यालयों में पढ़ना अनिवार्य होना चाहिए। यूपी सरकार को न्यायालय के फैसले को छह महीने में लागू कर कियान्वयन की आख्या न्यायालय में जमा करानी थी, किन्तु प्रदेश सरकार ने आज तक कुछ किया ही नहीं है।जहा आज कोई भी अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ना चाहता है। क्योंकि सरकारी स्कूल में शिक्षा का स्तर कितना अच्छा है यह हम सभी जानते है आज सिर्फ गरीब के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते है।

ऐसे में छत्तीसगढ के बलरामपुर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने नेता और अमीर लोगो के लिए एक बहुत ही अच्छा उदाहरण पेश किया है। हमारे देश के अपने मजबूत इरादों से प्रदेश के अन्य नौकरशाहों की बीच एक बडा संदेश दिया, जब उन्होंने अपनी 5 वर्षीय बेटी का एडमिशन एक सरकारी स्कूल में कराया. कलेक्टर साहब ने बेटी की प्रायमरी एजुकेशन के लिए जिला मुख्यालय के शासकीय प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय को चुना है।

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अवनीश कुमार शरण हमेशा से ही शिक्षा के स्तर को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं. इन्होंने न तो कभी शिक्षा में लापरवाही बर्दाश्त की और न ही कभी शिक्षकों को कोताही बरतने दी है. इसे लेकर वे राजधानी में भी अपनी पदस्थापना के दौरान सुर्खियों में रहे हैं. यह पहली बार नहीं है जब कलेक्टर अवनीश कुमार ने ऐसा कदम उठाया हो, इससे पहले अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए आंगनवाड़ी स्कूल में भी भेज चुके हैं. आपको बता दें बलरामपुर जिले में लोगों को शिक्षा के प्रति जागरुक करने के लिए ‘उड़ान’ और ‘पहल’ जैसी योजनाएं भी लॉन्च कीं इन योजनाओं की तारीफ खुद सूबे के मुखिया सीएम रमन सिंह कर चुके हैं.

आज जब हर कोई अपने बच्चे को महंगे से महंगे स्कूल में पढ़ाने की ख्वाहिश रखे हुए हैं, ऐसे में कलेक्टर अवनीश कुमार शरण का यह फैसला एक मिसाल बनकर उभरा है. अवनीश कुमार का यह फैसला उन अभिवावकों के लिए एक बड़ा संदेश है जो सरकारी स्कूल में कमियां निकालते हैं और फिर मोटी रकम चुका कर अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करवा देते हैं

अवनीश कुमार शरण की इस पहल से अब लगता है की सरकारी स्कूलों की पढ़ाई के स्तर में कुछ सुधार जरूर आएगा. जाहिर है कि जिस स्कूल में जिले के कलेक्टर या आला अधिकारियों के बच्चे पढेंगे उस स्कूल का शिक्षा का स्तर खुद-ब-खुद सुधर जाएगा. अवनीश कुमार का फैसला एक बड़ी प्रेरणा है।

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