केंद्र और केजरीवाल सरकार मे फिर हुआ टकराव, केंद्र ने 9 सलाहकारों को किया बर्खास्त

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एक तरफ जहां मध्यप्रदेश सरकार में बाबाओं को राज्य मंत्री पद का दर्जा दिया जा रहा है। वही दूसरी तरफ दिल्ली सरकार के मंत्रियो को अपने विभाग में सलाहकार रखने का भी हक़ नहीं है।  केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच एक बार टकराव देखने को मिल रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए केजरीवाल सरकार में नियुक्त 9 सलाहकार को बर्खास्त कर दिया है।

केंद्र का कहना है कि जिन पदों पर यह नियुक्तिया हुई है वह पद अवैधानिक पद थे आज तक सरकार ने ऐसे कोई पद बनाए ही नहीं और ऐसे किसी पद की मंजूरी केंद्र सरकार से नहीं ली गयी है।  साथ ही केंद्र सरकार ने कहा कि सर्विसेज विभाग केंद्र सरकार के तहत आता है इसलिए दिल्ली सरकार यह नियुक्ति नहीं कर सकती।

हटाए गए पदों में मनीष सिसोदिया की शिक्षा सलाहकार आतिशी मर्लिन, वित्त सलाहकार राघव चड्डा, मीडिया सलाहकार अरुणोदय प्रकाश के साथ साथ अमरदीप तिवारी, रजत तिवारी, राम कुमार झा, समीर मल्होत्रा, प्रशांत सक्सेना, और दिनकर अदीब शामिल है।

केंद्र के इस आदेश पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष शिशोदिया ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि ये आर्डर पूर्णतया बदले की करवाई के तहत पास किया गया है और इसका असली निशाना दिल्ली के स्कूलों में कायापलट करने वाली शिक्षा मंत्रालय में सलाहकार आतिशी मर्लिन है।

मनीष शिशोदिया ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि यह आम आदमी सरकार के शिक्षा क्षेत्र में किये सुधारो को कमजोर करने का प्रयास है। जहाँ एक तरफ मोदी सरकार में ऐसे सलाहकार है जो रेप के दोषियों को बचाने के तरीके बताते है वहीँ हमारे सलाहकार ऐसे है जो बच्चियों को शिक्षा देने का काम करते है। भाजपा की सरकारों में बाबाओ को मंत्री बनाया जाता है और हम  शिक्षा क्षेत्र में सुधर के लिए ऑक्सफ़ोर्ड के विद्वानों को 1 रूपये की तनख्वाह पर सलाहकार रखते है।

बर्खास्त हुए सलाहकारों में राघव चड्डा का भी नाम है।  इस पुरे मामले में उनका कहना है कि उनको अब बर्खास्त करने का सवाल ही नहीं उठता क्यूंकि वे जनवरी 2016 से मार्च 2016 तक दिल्ली का बजट बनाने की प्रक्रिया में वित्त सलाहकार थे। उनका ये कार्यप्रभार न्युक्ति के 45 दिन बाद समाप्त हो गया था। उन्होंने बताया कि वे सिर्फ एक रुपए प्रति महीना के वेतन पर दिल्ली सरकार को अपनी सेवा देते थे।

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