बीएमसी ने अपने सबसे शिक्षित सफाई कर्मचारी को निकला, पीएचडी की पढ़ाई के लिए माँगा था ट्रांसफर हो गयी छुटी

खबरे बहुजन आवाज

सिर्फ अच्छी तालीम हासिल कर लेने से आपके ख्वाब पूरे नहीं हो जाते हैं। कई बार आपके ख्वाबों के सामने दीवार बनकर आपकी पिछली जिंदगी खड़ी हो जाती है। शायद ऐसा ही कुछ सुनील के साथ हो रहा है।

सुनील यादव की उम्र 36 साल है और वो मायानगरी मुंबई में रहते हैं। सुनील का विश्वास है शिक्षा के जरिए ही बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। पर सुनील की कहानी यही पर थोड़ी अलग हो जाती है। इस समय सुनील के पास बीकॉम, बीए (जर्नलिज्म), एमए, एमफ़िल की डिग्रियां है और अब वो चैंबूर में स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस में पीएचडी कर रहे हैं।

सुनील यादव बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्य करते है । और सबसे बड़ी बात यह है कि इतने पढ़े-लिखे इस सफाई कर्मचारी को बीएमसी ने नौकरी से निकाल दिया है।

जनसंघर्ष से बात करते हुए सुनील यादव ने बताया की उनका कसुर सिर्फ यह है की उन्होंने महज ट्रांसफर की मांग की थी। वो भी इसलिए क्योंकि सुनील चैंबूर में स्थित टाटा इंस्टीट्यूट से पीएचडी कर रहे हैं और उन्हें दफ्तर आने में काफी समय लग जाता था

यह भी पढ़े   सफाई कर्मचारी दिवस पर देश के शहीदो को सलाम

दरअसल यहां आने के लिए सुनील को 3 ट्रेन बदलनी पड़ती थीं. वो चाहते थे कि उनका समय बच सके और वो ये वक्त पढ़ाई में लगा सकें। सुनील रात को सफाई कर्मचारी बन कर शहर की गदगी साफ़ करते है और दिन में अपनी पढ़ाई करते है पर इन सब के बीच सुनील की और भी जिम्मेदारी है।  सुनील अपने साथ साथ अपनी पत्नी और अपने बच्चो को भी देखते है।  सुनील अपने दोनों बच्ची को स्कूल भेजते है।

सुनील बताते है  कि उन्हें काफी समय से परेशान किया जा रहा है। बात तब की है जब सुनील अपनी मास्टर डिग्री कर रहे थे. उन्होंने तब स्टडी लीव मांगी तो उनके बॉस ने मना कर दिया. जबकि 24 महीने की छुट्टी का प्रावधान है। सुनील के कहा की उन्होंने जब कोर्ट में इसकी अपील की तो  जज ने टिप्पणी करते हुए कहा की अब यहाँ सफाई  कर्मचारी भी आने लगे।  बाद में कोर्ट ने आदेश दिया की  सुनील के पास पहले जो उनकी अपनी छुट्टिया है उसने वो इस्तेलमाल करे। जबकि ऐसा कही कोई प्रावधान नहीं है। हम 2 साल की छुट्टी ले सकते है पढ़ने के लिए।

आगे सुनील बताते है कि वर्ष 2014 में  लेबर वेलफेयर ऑफिसर की पोस्ट के लिए आवेदन किया था। पर टेक्निकल ग्राउंड पर उनका सिलेक्शन नहीं किया गया। सुनील ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आता जिस पद के लिए हम लोग योग्य हैं उस पद के लिए हमें पदोन्नत क्यों नहीं किया जाता है।

सुनील इन दिनों काफी परेशान है। सुनील का कहना है की हमारी 4 पीढ़ी यह काम कर रही है और मैं नहीं चाहता की कोई आगे यह काम करे इसलिए मैं पढ़ रहा हु। और इसलिए मैं अपनी पत्नी को भी पढ़ा रहा हुँ।  सुनील की पत्नी मुंबई यूनिवर्सिटी से लॉ कर रही है। पर अब जब नौकरी नहीं रही तो मैं कैसे यह सब करुगा।

सुनील, डॉ.भीमराव आंबेडकर से प्रेरित हैं जिन्होंने कहा था कि सिर्फ शिक्षा ही बदलाव ला सकती है।

 

Leave a Reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *