भीमा कोरेगाव हिंसा में गवाह दलित युवती की मौत, 2 गिरफ्तार, प्रकाश आंबेडकर ने हत्या बताया

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महाराष्ट पुलिस ने भीमा कोरेगाव में हुई दलित विरोधी हिंसा की गवाह पूजा सकात की मौत के मामले में दो लोगो को गिरफ्तार कर कुल नौ लोगो के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपो में मुकदमा दायर किया है। गौरमतलब है कि ग्यारवही कक्षा की छात्रा पूजा की लाश 22 अप्रैल को कोरेगांव से 2 किलोमीटर दूर वाडागांव के एक कुएं में मिली थी। पूजा 21 अप्रैल से लापता थी और उसके परिवारवालों ने गुमशुदगी की शिकायत पुलिस को की थी।

भारतीय रिपब्लिकन पक्ष (भारिप) बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश आंबेडकर ने दावा किया कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह हत्या है। डॉ. बीआर आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह हत्या है. उन्होंने इस थ्योरी को भी खारिज किया कि मौत की वजह संपत्ति विवाद हो सकता है। पुणे पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सुवेज हक ने कहा कि पीड़िता के परिवार और कुछ आरोपियों के बीच संपत्ति विवाद चल रहा था. पुलिस सभी कोणों से जांच कर रही है

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार शिकरापुर पुलिस ने विलास श्रीधर वेदपाठक और गणेश विलास पाठक को गिरफ्तार किया है और नवनाथ दन्यानोबा दारेकर, सोमनाथ फक्कड़ दारेकर, विलास कालूराम दारेकर, वकील सुधीर धामदेरे, सुभाष घवाते, गोरक्षा पटिलबुवा थोराट और गणेश गोरक्षा थोराट के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है।

1 जनवरी को भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200वी सालगिरह के मौके पर पुणे के भीमकोरे गांव में दलितों पर हिंदूवादी कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था जिसमे कई लोग घायल हो गए थे और करोड़ो की सम्पति को बर्बाद कर दिया गया था। इसे दंगे में पूजा साकत का घर भी जला दिया गया था जिसकी चश्मदीद गवाह पूजा थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार पूजा के भाई जयदीप ने बताया कि ‘शनिवार को लगभग दोपहर 1:30 बजे पूजा गांव में किसी से मिलने गयी थी। जब वो देर शाम तक घर नहीं लौटी तो हमने गांव के अलग अलग हिस्सों में ढूंढना शुरू किया और पूजा के दोस्तों से भी सम्पर्क कर पता करने की कोशिश की। वो नहीं मिली। फिर हमने शिकरापुर पुलिस स्टेशन में पूजा के गायब होने की सूचना दी। पूजा का शव रविवार को कोरेगांव भीमा से लगभग 2 किमी दूर एक कुएं में मिला।

पूजा की लाश मिलने के बाद आस पास के इलाके में माहौल गरम हो गया और पुलिस के भारी बंदोबस्त के बाद ही उसका पोस्टमार्टम हो पाया। पुलिस ने अनुसार पूजा के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था और ना ही उसके पास से कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है।

पूजा सकात ने अपने परिवार के लिए एक नया घर पाने के लिए पिछले तीन महीनों में विभिन्न सरकारी कार्यालयों से संपर्क कर रही थी। परिवार ने फरवरी में पुलिस के साथ प्राथमिकी केस दर्ज की थी कि कुछ स्थानीय गांव वालो से उन्हें खतरा है जो कि उन्हें परेशान कर रहे है क्योंकि पूजा भीमाकोरे गांव हिंसा की साक्षी थी। पूजा के भाई जयदीप ने बताया कि इसी डर के चलते उन्होंने शिकरापुर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई और 6 अप्रैल को मीडिया के साथ प्रेसवार्ता करते हुए बताया कि उनको धमकिया दी जा रही है पर पुलिस शिकायत दर्ज करने के बाद भी कोई करवाई नहीं कर रही है।

पूजा के दोनों भाई सुरेश और जयदीप 20 अप्रैल को किसी यात्रा पर अहमदनगर गए थे और 21 अप्रैल को वो गायब हो जाती है।

जयदीप को संदेह है कि उसे स्थानीय ग्रामीणों द्वारा अपने जीवन को समाप्त करने के लिए मजबूर किया गया हो सकता है या उसे कुएं में धकेल दिया जा सकता है।” पुणे के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम इस मामले की सभी संभावित जांच कर रहे है। पूजा के परिवार के सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करेंगे।

अब सवाल यह उठता है कि 1 जनवरी को भीमाकोरे गांव कि घटना हुई थी। हिंदुवादी संगठन शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के संस्थापक संभाजी भिड़े (भिड़े गुरूजी) और हिंदूवादी नेता मिलिंद एकबोटे के खिलाफ दंगा भड़काने के आरोप में शिक्रापुर पुलिस में शिकायत दर्ज की जाती है। इस मामले में गवाह बनने की बाद से ही पूजा को धमकी मिलनी शुरू हो जाती है। 14 मार्च को एकबोटे की गिरफतारी होती है। 20 अप्रैल अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की तरफ से एकबोटे को जमानत मिल जाती है। 21 अप्रैल को पूजा गायब हो जाती है और 22 तारीख को उसकी लाश कुएं में संदिग्ध हालत में मिलती है।

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