भीम आर्मी कार्यकर्ता की दिन दहाड़े हत्या, सहारनपुर में लगी धारा 144

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उत्तर प्रदेश में योगी राज के चलते दलितों का के खिलाफ अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आज सहारनपुर दंगो के ठीक एक साल बाद फिर दलितों का खून बहा, भीम आर्मी के सहारनपुर जिला अध्यक्ष कमल वालिया के छोटे भाई सचिन वालिया को आज दिन दहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी गयी।

अबतक यही पता चल पाया है कि घटना के समय सचिन वालिया कोल्ड ड्रिंक और कुछ सामान लेन घर से निकला था की और कुछ अज्ञात लोगो ने उसे गोली मार दी। उनको हॉस्पिटल ले जाया गया परन्तु उनकी मौत हो गयी। ये खबर आग की तरह आस पास के हर क्षेत्र में सोशल मीडिया के जरिये फेल गयी और हॉस्पिटल के बाहर ही भरी भीड़ जुट गयी।

इस घटने के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है फिलहाल पुलिस और जिला प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है जिसके लिए मृत के गांव में पीएसी और भारी फोर्स तैनात कर दी गई है। स्थिति ज्यादा तनाव पूर्ण न हो इसलिए क्षेत्र की मोबाइल सेवाएं बंध कर दी गयी है।

गौरमतलब है कि पिछले साल आज के ही दिन महाराण प्रताप जयंती के मौके पर सब्बीरपुर गांव में राजपूत समुदाय और दलित समुदाय के बीच दंगे हुई थे जिसमे दलित समुदाय के लगभग 65 लोगो को के घर जला दिए गए थे और काफी दलित घायल भी हुए थे। पिछले साल की तरह इस साल भी महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर सहारनपुर में तनाव का माहौल था।

स्थानीय मीडिया की खबरों से पता चला है कि अस्पताल में मृतक के परिवार वालो और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को शव को मुर्दाघर में रखने नहीं दिया और दोनों तरफ से धक्‍का-मुक्‍की हुई। मृतक के भाई कमल वालिया ने प्रशासन को अपने भाई की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप था कि राजपूत भवन के पास ही गोली मारी गई है। घटनास्थल के पास ही राजपूत भवन में महाराणा प्रताप जंयती पर पुलिस सुरक्षा के बीच कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यहां सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर सचिन को राजपूत भवन के पास गोली मारी गई तो आसपास मौजूद पुलिसबल क्‍या कर रहा था।

जनसंघर्ष ने अधिक जानकारी लेने के लिए जब भीम आर्मी के दिल्ली प्रदेश प्रभारी सुजीत सम्राट को फ़ोन किया तो उन्होंने बताया कि कल शाम तक महाराणा प्रताप जयंती मानाने की इजाजत राजपूत समुदाय को नहीं दी गयी थी। पर राजनैतिक दवाब के चलते प्रशासन ने अचानक कल देर रात राजपूत समुदाय को महाराणा प्रताप जयंती मानाने की इज़ाज़त दे दी। जब की हम सभी को आशंका थी की कोई न कोई दुर्घटना हो सकती है फिर भी प्रशासन ने कोई पुलिस प्रोटेक्शन नहीं दिया था।

In Uttar Pradesh, due to the Yogi Raj, the oppression against Dalits is not coming to a halt. Today, only a year after Saharanpur riots, a bhim army youth activist was killed, Sachin Walia, brother of Saharanpur district president of Bhim Army, Kamal Walia, was shot dead in broad day light.

It is now known that at the time of the incident, Sachin Walia cold drinks and some luggage lane came out of the house and some unknown people shot him. He was taken to the hospital but he died. Social media spread this news like a wildfire in every area around the crime spot and huge crowd filled outside the hospital.

Since this incident, there has been an atmosphere of tension in the area. At present, maintaining law and order in front of the police and district administration has become the biggest challenge, for which the PAC and heavy force have been deployed in the village of the dead. The situation is not full of stress, hence mobile services of the area have been tied up.

It is interesting to note that on the day of Maharana Pratap Jayanti on the same day last year, rioting was reported between Rajput community and Dalit community in Sabbirpur village, in which around 65 people of the Dalit community had burnt their houses and many were also injured. Like last year, Saharanpur had an atmosphere of tension in the year of Maharana Pratap’s birth anniversary.

योगी राज में फिर बहा दलितों का खून, भीम आर्मी कार्यकर्त्ता की दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या

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