बीजेपी का हिंदुत्व प्रेम दिखावा-ओवैसी

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के मुखिया और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गाय के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर आड़े हाथों लिया है।भारतीय जनता पार्टी के ‘गाय प्रेम’ पर सवाल उठाते हुए ने आरोप लगाया है कि बीजेपी राज्यों के हिसाब से इस मुद्दे पर अपना विचार बदल लेती है। ओवैसी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिए गाय ममी है और पूर्वात्तर में यमी है। साथ ही ओवैसी ने कहा कि यूपी में बूचड़खानों पर हो रही कार्रवाई से लाखों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

ओवैसी ने कहा, ‘इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि भारत भैंस का मीट निर्यात करके 26 हजार करोड़ रुपये पाता है। इसमें से उत्तरप्रदेश की हिस्सेदारी 11 हजार करोड़ रुपये है। भारत सरकार भैंस के मीट के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देती है। यहां इस किस्म के विरोधाभास हैं। एक आखिरी बात। यूपी में गाय ममी है, जबकि नॉर्थ ईस्ट में यमी है। क्या यह भारतीय जनता पार्टी का का पाखंड नहीं है? बीजेपी वहीं हिंदुत्व का प्रचार करती है जहां यह उसके मनमुताबिक होता है। नॉर्थ ईस्ट के तीन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। इस कारण से ये लोग वहां बीफ को इजाजत दे रहे हैं।’

पूर्वोत्तर के राज्यों में बीफ पर प्रतिबंध नहीं है। असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में सत्ता में होने के बावजूद बीजेपी ने वहां बीफ पर कोई बैन नहीं लगाया है। अवैध बूचड़खानों पर भी वहां कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ओवैसी ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों की वजह से सूबे के 15 लाख लोगों के रोजगार पर संकट पैदा हो गया है। ओवैसी ने कहा, ‘मुझसे विश्वास है कि सीएम उन लोगों की पीड़ा समझेंगे, जिनका खानदानी पेशा बूचड़खाना चलाना है।’

अगले साल मिजोरम सहित तीन पूर्वोत्तर के राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है और बीजेपी ने अभी से साफ कर दिया है कि अगर वह सत्ता में आती है तो बीफ पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी।

बता दें कि पूर्वोत्तर के राज्यो में ईसाई धर्म के लोगों की आबादी ज्यादा है और यहां बीफ बड़ी मात्रा में खाया जाता है। बहरहाल, उत्तरप्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद बूचड़खानों पर चल रही कार्रवाई पर ओवैसी लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। सोमवार को लोकसभा में मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि यूपी में न सिर्फ अवैध बल्कि वैध बूचड़खाने भी बंद कराए जा रहे हैं। ओवैसी ने कहा था कि जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय सरकार को बूचड़खाना संचालकों को वक्त देना चाहिए था।

कालेधन से तुलना करते हुए औवेसी ने यह भी कहा था कि अगर सरकार कालाधन रखने वालों को संपत्ति घोषणा का वक्त दे सकती है तो बूचड़खानों को नियमित करने का समय क्यों नहीं दिया जा सकता। ओवैसी ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई की आड़ में एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

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