2017 में 15 लाख लोग हुए बेरोजगार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के आमचुनाव से पहले चुनावी रैलियों में हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात की थी । सरकारी आकड़ों पर नज़र डाले तो देश में हर साल करीब 10 लाख तक की श्रमशक्ति को रोजगार की जरूरत होती है। लेकिन प्रधनमंत्री मोदी के शासनकाल में 10 लाख युवाओं को रोजगार मिलना तो दूर की बात बीते एक साल में 15 लाख युवाओं से रोजगार छीन लिए गए हैं।

सीएमआईई के कंज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार, नोटबंदी के बाद जनवरी से अप्रैल, 2017 के बीच देश में कुल नौकरियों की संख्या घटकर 405 मिलियन रह गयी थीं, जो सितंबर से दिसंबर, 2016 के बीच 406.5 मिलियन थी। इसका मतलब यह कि नोटबंदी के बाद नौकरियों की संख्या में करीब 1.5 मिलियन अर्थात 15 लाख की कमी आयी। देशभर में हुए हाउसहोल्ड सर्वे में जनवरी से अप्रैल, 2016 के बीच युवाओं के रोजगार और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जुटाए गये।

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इस सर्वे में कुल 1 लाख 61 हजार, एक सौ सड़सठ घरों के कुल 5 लाख 19 हजार, 285 युवकों पर सर्वे किया गया था। सर्वे में कहा गया है कि तब 401 मिलियन यानी 40.1 करोड़ लोगों के पास रोजगार था। यह आंकड़ा मई-अगस्त, 2016 के बीच बढ़कर 403 मिलियन यानी 40.3 करोड़ और सितंबर-दिसंबर, 2016 के बीच 406.5 मिलियन यानी 40.65 करोड़ हो गया। इसके बाद जनवरी से अप्रैल, 2017 के बीच रोजगार के आंकड़े घटकर 405 मिलियन यानी 40.5 करोड़ रह गये। मतलब साफ है कि इस दौरान कुल 15 लाख लोगों की नौकरियां खत्म हो गयीं।

बता दें कि पिछले साल 8 नवंबर की रात प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था और दावा किया था की नोटबंदी करने से कालाधन वापस आएगा और भ्रष्टाचार कम होगा । पर न तो नोटबंदी से काला धन वापस आया ब्लकि देश में अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। नोटबंदी से सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। लाखो लोग बेरोजगार हो गए ।

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